
नोएडा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत अब सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम फेल्योर की मिसाल बन चुकी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित SIT ने अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, जिसमें रेस्क्यू ऑपरेशन में गंभीर लापरवाही को सीधे तौर पर युवराज की मौत का कारण बताया गया है।
80 जवान मौजूद थे, फिर भी कोई नहीं उतरा पानी में!
SIT रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे के वक्त मौके पर SDRF, दमकल विभाग और पुलिस के करीब 80 जवान मौजूद थे। लेकिन ठंडे पानी और जरूरी उपकरणों की कमी का बहाना बनाकर किसी ने भी पानी में उतरने की हिम्मत नहीं दिखाई।
विडंबना यह रही कि अंत में एक डिलीवरी ब्वॉय मुनेंद्र को पानी में उतारा गया — लेकिन तब तक युवराज की सांसें थम चुकी थीं। सवाल ये नहीं कि मुनेंद्र क्यों उतरा, सवाल ये है कि वर्दीधारी क्यों नहीं उतरे?
SIT ने Mining Department को भी कठघरे में खड़ा किया
जांच के दौरान SIT ने खनन विभाग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट में इन बिंदुओं की पड़ताल की गई— कितनी गहराई तक मिट्टी निकालने की अनुमति थी? क्या तय सीमा से ज्यादा खनन हुआ? रॉयल्टी समय पर जमा हुई या नहीं? अगर अवैध खनन हुआ तो प्रशासन ने आंख क्यों मूंद ली?
खनन विभाग ने इन सवालों पर अलग से रिपोर्ट सौंपी है, जिसे अब सरकार क्रॉस-वेरिफाई कर रही है।

विभाग एक-दूसरे पर डालते रहे जिम्मेदारी
SIT को दिए गए जवाबों में नोएडा प्राधिकरण, पुलिस और प्रशासन एक-दूसरे पर दोष मढ़ते नजर आए। किसी भी विभाग ने खुलकर जिम्मेदारी नहीं ली। यानी युवराज डूबता रहा और सिस्टम फाइलें तैराता रहा।
अब फैसला योगी सरकार के हाथ
SIT की रिपोर्ट अब प्रदेश सरकार के पास है। कानूनी कार्रवाई होगी या सिर्फ अनुशासनात्मक नोटिस? जिम्मेदार अफसर बचेंगे या बलि का बकरा बनेगा कोई जूनियर?
इन सवालों के जवाब अब योगी सरकार के अगले कदम से मिलेंगे। पूरे प्रदेश की नजरें इस फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यह सिर्फ युवराज के लिए नहीं — पूरे सिस्टम के लिए टेस्ट केस है।
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